योग साधना में बुद्धि (अन्तःकरण) में स्थित वृत्तियाँ पर निरोध लगता है बुद्धि में समता स्थित होती है। वृत्तियाँ पर निरोध और समता की प्राप्ति, यह दोनों कार्य बुद्धि से सम्बन्धित है, इसलिये योग को बुद्धियोग भी कहते है।
श्रीमद् भगवद् गीता में बुद्धियोग सम्बंधित वर्णन।
अध्याय २ श्लोक ३९ में बुद्धियोग पद आया है।
धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष, मनुष्य जीवन के चार पुरुषार्थ है। यह चार पुरुषार्थ को करना ही मनुष्य जीवन का उदेश्य है। उद्देश्य इसलिये है क्योंकि इन चार पुरुषार्थ को करने से ही मनुष्य का कल्याण है। धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष, का अर्थ क्या है? यह पुरुषार्थ करने से मनुष्य का कल्याण किस प्रकार है? धर्म धर्म का अर्थ है कर्तव्य। श्रीमद […]
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