एश्र्वर्य‌

जब भोग की निरन्ता बनी रहती है, तब मनुष्य एश्र्वर्य‌ को प्राप्त है।

 

जो मनुष्य एश्र्वर्य‌ को प्राप्त है उसके पास भोग के साधन अन्य की अपेक्षा अधिक होते है। और अन्यों की अपेक्षा निरन्ता भी अधिक बनी रहती है।

अतः एश्र्वर्य‌ में भोग से साथ अन्य के भोग से वंचित होने का भी सुख है। एश्र्वर्य‌ में अहंकार की वृद्धि होती है।

धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष

धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष, मनुष्य जीवन के चार पुरुषार्थ है। यह चार पुरुषार्थ को करना ही मनुष्य जीवन का उदेश्य है। उद्देश्य इसलिये है क्योंकि इन चार पुरुषार्थ को करने से ही मनुष्य का कल्याण है। धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष, का अर्थ क्या है? यह पुरुषार्थ करने से मनुष्य का कल्याण किस प्रकार है? धर्म धर्म का अर्थ है कर्तव्य। श्रीमद […]

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अध्याय